Monday, 14 August 2017

वतन...



फूल तो कई है जहाँ में
पर फुलवारी है मेरा वतन 
यूँ तो कई रंग है जहाँ में 
पर रंगोली है ये मेरा वतन..

राम को पसंद ईद का शीरखुरमा
और अली को दिवाली के लड्डूओंका इंतजार है 
मनदीप और जोसेफ की यारी के किस्से हजार है..
मील-मील पर बदले यहा बोली   
पर हर बोली में झलकता प्यार है...

प्रेयर भी यहा, कलमा भी यहा 
बुद्ध का ध्यान भी और भजन में खो जाना है  
यही दोहे सुनाता कबीर
और यही बन्सी बजाता कान्हा है...  

जितना हिंदी महासागर मेरा 
उतनीही हिमालय की गोदी है 
भूलके भी न भूलना मगर 
कई वीर खेल गए जान से 
और कई आज भी खेलते हैं
तभी- करोडोंकी 'आजादी ' हैं ...!

#प्रतिज्ञा स्वतंत्रता की गरिमा बनाये रखने के लिए
#प्रतिज्ञा स्वातंत्र्याची प्रतिष्ठा कायम राखण्यासाठी 
#Pledge to keep Dignity of Freedom 
वंदे मातरम!
                                                                         -अमिता

1 comment:

  1. वंदे मातरम्!!! वतन को इन शब्द और प्रेरणा ओ मे किया है आपने जतन..आप हो युवा रतन!

    ReplyDelete