Thursday, 8 March 2018

बस...इतनी-सी बात है...

वो बोला :
कहो तो थोडा हाथ बटा दू?
आखिर तुम्हारे भी तो दो ही हाथ है 
आज बहोत आगे हो..खुश हो ना ?
कहो..अगर कोई बात है...

वो बोली :   

सूनते रहते हो ना तुम ..
"बेटा, वक्त पर खाना खा लेना" ,"भैय्या, जल्दी घर आ जाना"
"अजी..संभलकर ड्राइव्ह करना", "'पापा,दवाई समय से लेना"  
हा..शक्ती हूँ मै..पर अपनोंका खयाल भी रखती हूँ
डरती हू मगर..तुम्हारे डर को भी पहचान सकती  हूँ,
बस..इतनी-सी बात है..

आजादी के आकाश में उडती हूँ

पर मर्यादा और लिहाज की सीमाए भी जानती हूँ 
पूजा नहीं चाहती लेकिन 
मेरे पीठ-पीछे मेरे हुनर और जिगर के बजाय 
मेरी फिगर की बात न हो..बस..इतनी-सी बात है..
चुल्हा-चौका, झाडू-पोछा , कागज-कलम 
दफ्तर-वफ्तर,बच्चों की पढ़ाई..
गप्पे-शप्पे, रंगोली,सिलाई या कढाई..
जो भी करू दिमाग के साथ दिल भी लगाती हूँ,
बस..इतनी-सी बात है..
थक जाती हूँ कभी कभी 
मगर तुम यूँ ..कदर करते हो न 
तब बहुत खुश होती हूँ,
बस..इतनी-सी बात है.. 


बेशक खूश हूँ मैं
आखिर औरत-मर्द जंग थोडेही है ? 
जीवन अगर महफिल है , 
तो उसे हरदम सुरीली बनाये रखना
ये मेरी जज़्बात है.. 
न तुम्हारे आगे, न तुम्हारे पीछे 
बस..साथ चलने की बात है..
सच कहती हूँ..बस..इतनी-सी बात है..
#यूँही...
#From_Woman's_Heart...
#Respect_Everyone_Irrespective_of_Gender
                                                                                                                                         -अमिता