Tuesday, 23 October 2018
Sunday, 21 October 2018
दिया है यकीन का यारो,
और उसमें लगी आरजू की तार है
बिजली के होते हुए,
अंधेरे की बात..बेकार है...
पुछिए हर तार से जी..
जलना तो बस बहाना है,
इस रोशनी से रोशन
किसी का आशियाना है...
हररोज कोई दिल यहाँ..
खोलता ख्वाबों की किताब है,
मामुली चिराग ही सही,
जलाओ अगर विश्वास से ..
तो - 'आफताब' है...!
#यूँही.._चिराग
(आफताब = सूरज/sun)
- अमिता
Picture Credit - this creative bulb is clicked by me @ - Hotel Orion ,पुणे
हा कल्पक विजेचा दिवा (बल्ब)मला Hotel Orion ,पुणे येथे दिसला(Thanks to the place!)
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