दुनिया भी एक
अजब-सा मेला है
कोई मस्ती में
चूर तो
कोई भीड में अकेला है
अपनी अपनी वजह
, अपने अपने बहाने
हैं
हर एक चेहरे
के पीछे न जाने कितने
अफसाने हैं
कुछ बेचनेवाले, कुछ खरीदनेवाले
बाकी तो बस
- खिलौने हैं ...
भलाई के गुब्बारों
में
कभी कभी होती है स्वार्थ की हवा
धतुरे जैसी चीज
- किसीके लिए जहर
तो किसी के
लिए दवा...
पार तो सबको
है लगना
पर कभी आंधियोंसे
राहे अलग हो जाती है
खिवय्या कोई और
मगर कश्ती खामख़ाँ
बदनाम होती है...
याद रखना ए
दिल ,
तुझे न झुकना
है , न रुकना है
आखिरी सांस तक
बस - अपने जमीर
पर टिकना है... |
-
अमिता
दुनिया भी एक
अजब-सा मेला है
कोई मस्ती में
चूर तो
कोई भीड में अकेला है
अपनी अपनी वजह
, अपने अपने बहाने
हैं
हर एक चेहरे
के पीछे न जाने कितने
अफसाने हैं
कुछ बेचनेवाले, कुछ खरीदनेवाले
बाकी तो बस
- खिलौने हैं ...
भलाई के गुब्बारों
में
कभी कभी होती है स्वार्थ की हवा
धतुरे जैसी चीज
- किसीके लिए जहर
तो किसी के
लिए दवा...
पार तो सबको
है लगना
पर कभी आंधियोंसे
राहे अलग हो जाती है
खिवय्या कोई और
मगर कश्ती खामख़ाँ
बदनाम होती है...
याद रखना ए
दिल ,
तुझे न झुकना
है , न रुकना है
आखिरी सांस तक
बस - अपने जमीर
पर टिकना है... |
-
अमिता