सवालों को सिरहाने लेके
सो रही है जिंदगी
कोई सुबह अब..जवाब लेके आए
न जाने कितने टुकडों में
खो गई है जिंदगी
कोई लमहा अब..तस्वीर बनाके जाए
हस्ती वही..जमीं भी वही
पर कैसी ये हवा है..
सीखे नहीं थे..सीख गये है,
'धीरज भी दवा है..!'
#यूँही...
-©अमिता
Note:
सिरहाने- उशाशी/towards head
लमहा- क्षण/moment
हस्ती- व्यक्तित्व/ personality
जमीं - जमीन
