जिंदगी की कसम..
जिंदगी से तकरार नहीं
जिक्र फूलों का है,
पर ये मौसम-ए-बहार नहीं..
रुखी हवा में भी दिल..होता है ना नम ?
घिर आती है बदरिया..बेवजह..बेमौसम..
बाहर का शोर दुनिया सुने..
पर अंदर का शोर ? एक खुदा..एक हम...!
संभलके चलो- हवा को कहना..
आसान है क्या ..दायरों में बहना..?
वक्त ने कहा- "थोडा इंतजार फर्माना.."
हमने भी हसके सुनाया-
"तोहफा हो नायाब..,तो कुबूल है जुर्माना...!"
#यूँही...
- ©️अमिता
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PC- Namrata Patil
Note:
१.मौसम-ए-बहार- वसंत ऋतू
२. बदरिया- मेघ/clouds
३.दायरों में- मर्यादा में/in specific radius
४.तोहफा- gift , नायाब- बढिया और जो जल्दी न मिले
५.जुर्माना- दंड(हिंदी- कीमत)/fine
