अमिताक्षरे
- मनाच्या आसमंतात भिरभिरणारी पाखरे...
Thursday, 9 November 2017
मै ठहरू तो चले ,मै चलू तो भागे वो
हररोज कहानी ये होती है..
फिसले रेत-सा कभी..और जी लिया तो मोती है..
वक्त से ही लडाई और वक्त से ही दोस्ती है
वक्त ने ही कीमतें दे रखी है जहाँ को
यूँ तो..जिंदगी भी यहाँ बडी सस्ती है...
#Time_Is_Precious
#यूँही...
- अमिता
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