Sunday, 9 October 2016

पैसा...


आज जब हमने अपना बटुआ खोला
हाथ आतेही पैसा बोला-
"रखना मत, कुछ पुछना है तुमसे
बताओ क्या तुम्हे पता है ?
इन्सानों के लिए तो सुना था
पर क्या हमारे लिए भी कोई...ब्युटी पार्लर होता है ?
बरसों से कहते आए लोग कि पैसा बोलता है
पर सुना है अब तो काला पैसा सफेद भी होता है !
हमने कहा- " सुन पैसे,
यहा कोई पैंसों से खाता है
तो कोई पहले पैसा ही खाता है
कोई नेकी से कमानेवाला
तो कोई दुसरों की दौलत पे हक जमानेवाला
इसीलिये तू कही सफेद है और कही काला..
काले पैंसों से चीजें तो मिलती हैं पर चैन नहीं
सुख मिलता है पर सुकून नहीं
शोहरत मिलती है पर सच्चा सम्मान नहीं..
कमाया जो कुछ, सब यही छोडके
कमानेवाला एक दिन जायेगा
जिनके लिए कमाया वो भी नहीं जा सकतें
पैंसों का गुमान क्या खाक साथ जायेगा ?
सच है, बहोत कुछ होता है पैंसों से
पर फिर भी पैसा ही सबकुछ नहीं होता
नहीं तो कोई गरीब कभी चैन से नहीं सोता
और कोई अमीर महलों में नहीं रोता..
कम हो या ज्यादा,
नियत साफ तो पैसा भी साफ है
आखिर पैसा तो पैसा है
बुरे और अच्छे - हम और आप है.."
ये सुनके वो बोला -
समझा पूरी बात, अब बटुए में रहता हूँ
उसके पहले बस एक बात कहता हूँ
" यूँ  तो दुनिया दिवानी है मेरी
फिर भी ये पैसा डरता है
कि कोई, अपनी करतूतोंसे मुझे बदनाम न कर दे
दुवा है मेरी बस यही
मुझे काले से सफेद करनेवालों के दिलों में भी
कोई वो सफेदी भर दे
कोई वो सफेदी भर दे...!"
                                       - अमिता

1 comment:

  1. How can u talk with time & money?
    In ur previous poem, u talked with time n this time money.

    Nice imagination of beauty parlor for money to turn it from black to white.

    And brilliantly concluded with positive expectation 😊

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