एक दिन किस्मत ने हमारा दरवाजा खटखटाया
और बोली - " मेरे चाहनेवाले तो बहोत हैं - मगर इनका कोई नहीं
संभालो इन मुश्किलोंको
मैं मिलूंगी तुम्हें फिर कही"
तब से मुश्किले हमारे साथ आयी
उम्र के साथ वो भी बडी हुई
गम के अंधेरे भी आये जिंदगी में
और आये खुशियों के मौसम
उनके साथ ही बढाया हमने अपना हर कदम
फिर एक दिन किस्मत वापस आयी
बोली - लौटा दो उन मुश्किलोंको
जो मैने थी तुम्हारे दामन में डाली
हमने कहा - "बरसों की दोस्ती पलभर में कैसे तोडे ?
हर मोड पर जो मिल जाये -उनसे मुॅह कैसे मोडे ?
खूब शिकायत करता है जमाना
पर हमें तो उनकी आदत-सी हो गयी है
और शायद.... भा गये हम उन्हे इसकदर
कि उनको भी हमसे मोहब्बत हो गयी है
उनको भी हमसे मोहब्बत हो गयी है ....|"
और बोली - " मेरे चाहनेवाले तो बहोत हैं - मगर इनका कोई नहीं
संभालो इन मुश्किलोंको
मैं मिलूंगी तुम्हें फिर कही"
तब से मुश्किले हमारे साथ आयी
उम्र के साथ वो भी बडी हुई
गम के अंधेरे भी आये जिंदगी में
और आये खुशियों के मौसम
उनके साथ ही बढाया हमने अपना हर कदम
फिर एक दिन किस्मत वापस आयी
बोली - लौटा दो उन मुश्किलोंको
जो मैने थी तुम्हारे दामन में डाली
हमने कहा - "बरसों की दोस्ती पलभर में कैसे तोडे ?
हर मोड पर जो मिल जाये -उनसे मुॅह कैसे मोडे ?
खूब शिकायत करता है जमाना
पर हमें तो उनकी आदत-सी हो गयी है
और शायद.... भा गये हम उन्हे इसकदर
कि उनको भी हमसे मोहब्बत हो गयी है
उनको भी हमसे मोहब्बत हो गयी है ....|"
- ©️अमिता अशोक पाटील
Bhari
ReplyDeleteThanks Dhanu..
Deleteअप्रतिम..
ReplyDeleteThanks..
Deleteसुंदर..।।
ReplyDeleteतू खूप छान लिहितेस ��
Keep it Up..!!����
सुंदर..।।
ReplyDeleteतू खूप छान लिहितेस ��
Keep it Up..!!����
thank you so much...
DeleteBahot khub likha hai aapne Amitaji... :)
ReplyDeleteShukriya Snehalji...:)
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