Saturday, 21 November 2015

मुश्किलें

एक दिन किस्मत ने हमारा दरवाजा खटखटाया
और बोली - " मेरे चाहनेवाले तो बहोत हैं - मगर इनका कोई नहीं
संभालो इन मुश्किलोंको
मैं मिलूंगी तुम्हें फिर कही"
तब से मुश्किले हमारे साथ आयी
उम्र के साथ वो भी बडी हुई
गम के अंधेरे भी आये जिंदगी में
और आये खुशियों के मौसम
उनके साथ ही बढाया हमने अपना हर कदम
फिर एक दिन किस्मत वापस आयी
बोली - लौटा दो उन मुश्किलोंको
जो मैने थी तुम्हारे दामन में डाली
हमने कहा - "बरसों की दोस्ती पलभर में कैसे तोडे ?
हर मोड पर जो मिल जाये -उनसे मुॅह  कैसे मोडे ?
खूब शिकायत करता है जमाना
पर हमें तो उनकी आदत-सी हो गयी है
और शायद.... भा गये हम उन्हे  इसकदर
कि उनको भी हमसे मोहब्बत हो गयी है
उनको भी हमसे मोहब्बत हो गयी है ....|"
                                                   ©️अमिता अशोक पाटील 

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