Wednesday, 22 August 2018


सरलता चीखती है कभी कभी
मेरी सुनो, मेरी सुनो..
पर दुनिया कहती है-
पगले, हरिश्चंद्र ना बनो!
फिर भी सच्चाई छूटती नही खुदा,
ईमानदारी तो जैसे कोई लत है..
फूलों को क्या पता,
उन्हे कुचलना ही शायद..
इस जमाने की फितरत है...
#यूँही..
#DarkSideOfThe_World
                                           - अमिता

No comments:

Post a Comment