इंतजार की घड़िया
शायद ही कोई
पसंद करता है
पर ये भी
सच है कि
कोई सब्र से,
कोई बेसब्री से,
कोई डर से
तो कोई धीरज
से
यहा हर कोई
किसी न किसी
का इंतजार करता
है..
धरती को बरसात
का, चाँदनी को
रात का
होठों को बात
का इंतजार..
सवालों को जवाब
का, अंधेरे को
आफताब का
और काबिलीयत को
किताब का इंतजार..
चाँद को पूनम
का फुलोंको शबनम
का
गीत को सरगम
का इंतजार
कलियों को
सुबह का और
पहेली को वजह
का इंतजार..
ख्वाबों को उम्मीद
का, जुनून को
जीत का
तनहा दिल को
मीत का इंतजार
दिये को बाती
का और अकेले
को साथी का
इंतजार..
बागों को सावन
का, घटा को
पवन का
तो किसी राधा
को मोहन का
इंतजार...
भक्त को भगवान
का, यजमान को
मेहमान का
कलाकार को कदरदान
का इंतजार..
चोर को मौके
का, पुलिस को
खबर का
तो आशिक को
एक नजर का
इंतजार
कश्ती को साहिल
का और राही
को मंजिल का
इंतजार...
ये घड़िया होती भी
बडी अजीब हैं
आसानी से कटती
भी नहीं
और खत्म होने
के बाद यादों
से हटती भी
नहीं..क्यों ?
क्योंकि-
' कोई आयेगा ' ये विश्वास
हैं इंतजार
आनेवाला 'कीमती' हैं ये
एहसास है इंतजार..
कोई कहे वक्त
की शरारत और
हमारी रुसवाई है इंतजार
पर शायद..
जिंदगी की तेज
रफ्तार से थककर
वक्त भी लेता
होगा कभी
वो अंगडाई है इंतजार...!!!
- अमिता

Nice one ��
ReplyDeleteApla vaait vel asto tenvach to aalshi asto ��
Last Line khup mast ahe��
Amita its a good composition... Could not stop till last line..
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